शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू – केंद्र सरकार

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Teacher TET Central Government Update: टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद केंद्र सरकार ने संसद में अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। सरकार ने कहा है कि शिक्षकों को टीईटी से सामूहिक छूट देने की कोई योजना नहीं है और यह नियम आगे भी लागू रहेगा। इस जवाब के बाद देशभर में यह मुद्दा चर्चा में आ गया है, क्योंकि कई शिक्षक लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहे थे। अब केंद्र सरकार के साफ बयान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है, जिससे हजारों शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। सरकार का यह जवाब शिक्षा मंत्री से पूछा गया था जिसका लिखित जवाब सरकार की ओर से आया है राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य बताया है और लंबे समय से TET छूट की उम्मीद लगाए शिक्षकों को सरकार का जवाब मिल गया है।

संसद में सरकार का स्पष्ट बयान

केंद्र सरकार ने संसद में लिखित जवाब देते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा न्यूनतम योग्यता बनी रहेगी और इसे खत्म करने या सभी शिक्षकों को एक साथ छूट देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। बता दें कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना जरूरी माना गया है। वहीं सरकार ने यह भी साफ किया कि यह नियम शिक्षा का अधिकार कानून के तहत तय किया गया था, जिससे इसमें बदलाव करना संभव नहीं है। इस जवाब के बाद देशभर में शिक्षकों के बीच चर्चा तेज हो गई है और कई लोग अपने भविष्य को लेकर असमंजस में नजर आ रहे हैं।

कोर्ट के फैसले का हवाला दिया

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि टीईटी न्यूनतम योग्यता का हिस्सा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि नियम सभी पर समान रूप से लागू रहेगा और पूरी छूट देने का कोई आधार नहीं है। इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि टीईटी नियम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आगे भी यही व्यवस्था जारी रहेगी, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला यहां पढ़ें

दो साल में पास करना होगा

सरकार के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें फैसले की तारीख से दो साल के अंदर टीईटी पास करना जरूरी होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय में परीक्षा पास नहीं करता है, तो उसे आगे चलकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं जिन शिक्षकों की सेवा पांच साल से कम बची है, वे बिना टीईटी पास किए सेवा में बने रह सकते हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। इस नियम के बाद शिक्षकों के बीच तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सभी शिक्षकों पर लागू रहेगा नियम

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि यह नियम केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों पर भी लागू रहेगा। यानी जो शिक्षक भविष्य में पदोन्नति चाहते हैं, उनके लिए टीईटी पास करना जरूरी रहेगा। वहीं सरकार ने यह भी कहा कि फिलहाल किसी तरह की अतिरिक्त छूट देने की कोई योजना नहीं है, जिससे साफ हो गया है कि आने वाले समय में भी यह नियम जारी रहेगा और इसमें बदलाव की संभावना नहीं है।

उत्तर प्रदेश में भी लाखों शिक्षक प्रभावित

सरकार के इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश में भी दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 1.86 लाख ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं की है और अब उन्हें तय समय के भीतर परीक्षा पास करनी होगी। वहीं 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पूरी छूट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कई शिक्षकों के लिए उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियां और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है, जिससे उनके बीच चिंता और बढ़ गई है।


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